- हड़ताली चौक पर बैरिकेडिंग के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने जताया आक्रोश, मुख्यमंत्री और पंचायती राज मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, सात दिनों में मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
पटना : बिहार की राजधानी पटना में गुरुवार को स्थानीय निकाय ग्राम कचहरी प्रतिनिधि महासंघ एवं त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि महासंघ के संयुक्त आह्वान पर पंचायत प्रतिनिधियों ने अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रतिनिधियों ने पंचायती राज विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मंत्री और सचिव के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों को हड़ताली चौक पर पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण रोक दिया गया, जिसके बाद वहां सभा आयोजित की गई। बाद में आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री और विभागीय सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा।
दरोगा राय ट्रस्ट भवन में हुई महाबैठक
प्रदर्शन से पहले पटना के दरोगा राय ट्रस्ट भवन में पंचायत प्रतिनिधियों की संयुक्त महाबैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुखिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश राय ने की, जबकि मंच संचालन पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष आमोद निराला ने किया।
बैठक में सरपंच, मुखिया, प्रमुख, जिला परिषद सदस्य, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, पंच, उपसरपंच और उपमुखिया सहित विभिन्न पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में 11 सूत्री मांगों के समर्थन में प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।
प्रतिनिधियों ने पंचायती राज विभाग पर मांगों को लागू करने में टालमटोल करने और अधिकारियों की मनमानी का आरोप लगाया। बैठक में विभाग की कार्यशैली के विरोध में निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया।
पेंशन, भत्ता और सुरक्षा समेत कई मांगें उठाईं
बैठक को संबोधित करते हुए सरपंच संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सह खगड़िया जिला अध्यक्ष किरण देव यादव ने पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों से जुड़ी कई मांगें रखीं।
इनमें वर्ष 2001 से पेंशन शुरू करने, पंचायती राज आयोग का गठन करने, एमएलसी चुनाव में पंचायत प्रतिनिधियों को मतदाता बनाने, लाइसेंसी हथियार उपलब्ध कराने, ग्राम कचहरी के प्रहरियों को चौकीदार के रूप में समायोजित करने तथा लंबित भत्तों का भुगतान करने की मांग शामिल है।
इसके अलावा प्रतिनिधियों ने भत्तों में वृद्धि, सम्मान, सुरक्षा, सुविधाएं, वेतन, बीमा और पेंशन सहित विभिन्न अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की।
हड़ताली चौक पर पुलिस से हुई नोकझोक
महाबैठक के बाद पंचायत प्रतिनिधियों ने ट्रस्ट भवन से निकलकर विभिन्न मार्गों से होते हुए पंचायती राज मंत्री एवं विभागीय सचिव के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों को हड़ताली चौक पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान प्रतिनिधियों ने आक्रोशपूर्ण नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रतिनिधियों के बीच जद्दोजहद होने की भी जानकारी सामने आई।
इसके बाद प्रतिनिधियों ने सभा आयोजित कर अपनी मांगों को दोहराया और आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री एवं विभागीय सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा।
नेताओ ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
मुखिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश राय ने कहा कि जब तक पंचायत प्रतिनिधियों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आगे निर्णायक संघर्ष करने की बात कही।
वहीं, पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष आमोद निराला ने पंचायती राज विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रतिनिधियों की मांगों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रमुख संघ की प्रदेश अध्यक्ष जयमाला पासवान ने भी मांगें पूरी नहीं होने पर मंत्री के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की चेतावनी दी।
सात दिनों का अल्टीमेटम
प्रदर्शन में शामिल प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रतिनिधियों ने कहा कि मांगें पूरी कराने के लिए आगे व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है।
प्रदर्शन में पंच-सरपंच संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सह खगड़िया जिला अध्यक्ष किरण देव यादव, सहरसा जिला अध्यक्ष विनोद यादव, सचिव लाल बहादुर शाह, मधेपुरा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र यादव, उपाध्यक्ष राजकुमार यादव, प्रखंड अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सहित नागेश्वर सिंह, दिलीप सिंह, मनोज सिंह, ध्रुव सिंह तथा प्रहरी संघ के भागवत राम, प्रभास यादव, अनिल कुमार, लालू मंडल, इंद्रजीत सिंह, दयानंद यादव और प्रदीप शर्मा समेत बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
मुख्य मुद्दा :– पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकार से 11 सूत्री मांगों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें लागू करने की मांग की है। अब देखना होगा कि सरकार और पंचायती राज विभाग इस ज्ञापन पर क्या कदम उठाते हैं।





