दरभंगा : बीआरसी बहेड़ी में बुधवार को बीईओ मणिशंकर कुमार के नेतृत्व में प्रधान शिक्षक एवं प्रधानाध्यापकों के लिए एक दिवसीय टीएआरएल (TaRL—Teaching at the Right Level) प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में बच्चों के वास्तविक शैक्षणिक स्तर की पहचान करने, उनकी भाषा एवं गणित संबंधी दक्षताओं का आकलन करने और आकलन के परिणामों के आधार पर शिक्षण कार्य की योजना बनाने की जानकारी दी गई। मास्टर प्रशिक्षक शंभू कुमार, अंगद प्रसाद राणा, प्रदीप कुमार और नौना कुमारी ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चों को केवल उनकी कक्षा के आधार पर पढ़ाने के बजाय उनकी वास्तविक सीखने की क्षमता के अनुरूप शिक्षण उपलब्ध कराना है। इस प्रक्रिया में PadhAI Mitra ऐप को एक डिजिटल सहायक के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसके माध्यम से शिक्षक बच्चों की भाषा एवं गणित की दक्षता का आकलन कर सकते हैं। ऐप में उपलब्ध आकलन, परिणाम, सारांश ग्राफ और डेटा सिंक जैसी सुविधाओं की मदद से बच्चों की प्रगति को व्यवस्थित ढंग से समझने का प्रयास किया जा सकता है।
प्रशिक्षण में उपलब्ध कराई गई PadhAI Mitra ऐप उपयोग मार्गदर्शिका के अनुसार, ऐप का उद्देश्य बच्चों को सुनकर और समझकर पढ़ने तथा गणित करने के स्तर को जानने में शिक्षकों की सहायता करना है। इसमें भाषा और गणित में बच्चों की दक्षता को सरल तरीके से समझने तथा परिणामों को ग्राफ के रूप में देखने की सुविधा बताई गई है।
1. TaRL पद्धति क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों है?
TaRL का पूरा नाम Teaching at the Right Level है। इसका आशय है—बच्चों को उनके वास्तविक शैक्षणिक स्तर के अनुरूप पढ़ाना।
किसी कक्षा में पढ़ने वाले सभी बच्चों की सीखने की क्षमता एक जैसी नहीं होती। कुछ बच्चे आसानी से शब्द और वाक्य पढ़ लेते हैं, कुछ अक्षरों की पहचान तक सीमित रहते हैं, जबकि कुछ बच्चों को पढ़ने, समझने और गणित के बुनियादी सवाल हल करने में अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होती है।
ऐसी स्थिति में केवल पाठ्यपुस्तक का निर्धारित पाठ पूरा कराना पर्याप्त नहीं होता। शिक्षक के लिए यह जानना भी आवश्यक है कि प्रत्येक बच्चा वास्तव में क्या सीख पाया है और उसे आगे बढ़ाने के लिए किस प्रकार के अभ्यास की जरूरत है।
TaRL पद्धति में इसी बात पर जोर दिया जाता है। इसके अंतर्गत—
1. बच्चों के वर्तमान शैक्षणिक स्तर की पहचान की जाती है।
2. भाषा और गणित की बुनियादी दक्षताओं का आकलन किया जाता है।
3. समान या मिलते-जुलते सीखने के स्तर वाले बच्चों को उपयुक्त शिक्षण गतिविधियों से जोड़ने की योजना बनाई जाती है।
4. बच्चों की जरूरत के अनुसार अभ्यास, गतिविधियां और शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाती हैं।
5. समय-समय पर पुनः आकलन कर उनकी प्रगति देखी जाती है।
इसका उद्देश्य कमजोर बच्चों को पीछे छोड़ना नहीं, बल्कि उनकी बुनियादी दक्षताओं को मजबूत करते हुए उन्हें क्रमशः अगले स्तर तक पहुंचाना है।
2. PadhAI Mitra ऐप: शिक्षकों के लिए डिजिटल सहायता
प्रशिक्षण पुस्तिका में PadhAI Mitra ऐप को बिहार सरकार, जिला प्रशासन खगड़िया और प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन की पहल के रूप में दर्शाया गया है। ऐप का उपयोग बच्चों की भाषा एवं गणित संबंधी दक्षताओं का आकलन करने और प्राप्त परिणामों को व्यवस्थित रूप में देखने के लिए किया जा सकता है।
ऐप की उपयोग मार्गदर्शिका में प्रमुख रूप से निम्न सुविधाओं का उल्लेख है—
– ऐप डाउनलोड एवं इंस्टॉल करना।
– स्कूल आईडी से साइन-इन करना।
– बच्चों की प्रोफाइल खोजना और चुनना।
– भाषा आकलन करना।
– गणित आकलन करना।
– आकलन के परिणाम देखना।
– सारांश ग्राफ के माध्यम से बच्चों की स्थिति समझना।
– डेटा सिंक करके आकलन संबंधी जानकारी को समन्वित करना।
इन सुविधाओं का सही उपयोग करने के लिए शिक्षकों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। ऐप में दिखाई देने वाले विकल्पों के नाम या स्क्रीन का स्वरूप संस्करण के अनुसार बदल सकता है, इसलिए वास्तविक उपयोग के समय ऐप में उपलब्ध विकल्पों और विभागीय निर्देशों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
3. ऐप डाउनलोड, इंस्टॉल और प्रोफाइल चुनने की प्रक्रिया
PadhAI Mitra ऐप का उपयोग शुरू करने के लिए प्रशिक्षण पुस्तिका में तीन प्रमुख चरण बताए गए हैं।
चरण 1: ऐप डाउनलोड एवं इंस्टॉल करना
सबसे पहले शिक्षक को अपने मोबाइल फोन में Google Play Store खोलकर PadhAI Mitra ऐप खोजना होगा। इसके बाद उपलब्ध ऐप को डाउनलोड और इंस्टॉल करना होगा।
ऐप इंस्टॉल होने के बाद उसे खोलकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके मोबाइल में पर्याप्त स्टोरेज हो और ऐप का उपयोग करने के लिए आवश्यक इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध हो।
चरण 2: स्कूल आईडी से साइन-इन करना
ऐप खोलने के बाद शिक्षक को स्कूल आईडी के माध्यम से साइन-इन करना होगा। इसके लिए पुस्तिका में दिखाए गए लॉगिन विकल्प का उपयोग करना है।
साइन-इन पूरा होने के बाद शिक्षक ऐप में उपलब्ध बच्चों की प्रोफाइल सूची तक पहुंच सकते हैं। लॉगिन में समस्या आने पर स्कूल आईडी की शुद्धता और विभागीय रूप से उपलब्ध कराए गए निर्देशों की जांच करनी चाहिए।
चरण 3: बच्चों की प्रोफाइल खोजना और चुनना
साइन-इन के बाद ऐप में बच्चों की प्रोफाइल सूची दिखाई देती है। पुस्तिका के अनुसार, सर्च और फिल्टर विकल्पों की सहायता से किसी बच्चे की प्रोफाइल आसानी से खोजी जा सकती है।
बच्चे की प्रोफाइल चुनने के बाद शिक्षक उसके भाषा या गणित आकलन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। आकलन से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सही बच्चे की प्रोफाइल चुनी गई है, ताकि परिणाम संबंधित बच्चे के रिकॉर्ड में दर्ज हों।
4. भाषा आकलन: बच्चों की पढ़ने और समझने की क्षमता की पहचान
PadhAI Mitra ऐप में भाषा आकलन एक प्रमुख सुविधा है। इसका उद्देश्य बच्चों की भाषा संबंधी दक्षताओं का पता लगाना है, ताकि शिक्षक यह समझ सकें कि बच्चा पढ़ने के किस स्तर पर है और उसे किस प्रकार के अभ्यास की आवश्यकता है।
प्रशिक्षण पुस्तिका के भाषा आकलन वाले पृष्ठ में बच्चे की प्रोफाइल चुनने, आकलन शुरू करने और परिणाम दर्ज करने की प्रक्रिया दिखाई गई है।
भाषा आकलन की प्रक्रिया
- ऐप में संबंधित बच्चे की प्रोफाइल खोलें।
- भाषा आकलन का विकल्प चुनें।
- बच्चे को दिए गए निर्देशों के अनुसार आकलन की गतिविधि पूरी कराएं।
- बच्चे के वास्तविक प्रदर्शन के आधार पर उपयुक्त विकल्प दर्ज करें।
- आकलन पूरा होने पर परिणाम देखें और आवश्यकतानुसार उसे सेव करें।
भाषा आकलन में किन बातों पर ध्यान दें?
बच्चे की पढ़ने की दक्षता समझने के लिए शिक्षक को यह देखना चाहिए कि वह अक्षरों की पहचान कर पाता है या नहीं, शब्दों को पढ़ सकता है या नहीं, वाक्य पढ़ने में कितना सक्षम है और पढ़ी गई सामग्री को समझ पाता है या नहीं।
हालांकि, पुस्तिका के चित्रों में सभी आकलन प्रश्नों का पूरा विवरण स्पष्ट नहीं है। इसलिए उपर्युक्त बिंदुओं को भाषा दक्षता समझने के सामान्य उदाहरण के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि ऐप के प्रत्येक संस्करण की आधिकारिक प्रश्न-सूची के रूप में।
आकलन का उद्देश्य बच्चे को कमजोर घोषित करना नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक आवश्यकता पहचानना है। यदि कोई बच्चा अक्षर पहचानने में कठिनाई महसूस करता है, तो उसे अक्षर पहचान और ध्वनि संबंधी गतिविधियों से सहायता दी जा सकती है। यदि बच्चा शब्द पढ़ लेता है, लेकिन वाक्य समझने में कठिनाई होती है, तो उसके लिए पढ़ने और समझने का अभ्यास उपयोगी होगा।
5. गणित आकलन: बुनियादी गणितीय दक्षताओं की पहचान
गणित आकलन का उद्देश्य बच्चों की गणितीय समझ का पता लगाना है। केवल यह जानना पर्याप्त नहीं है कि बच्चा गणित की पुस्तक में कौन-सा अध्याय पढ़ रहा है। यह समझना भी जरूरी है कि वह संख्या पहचान, संख्या क्रम और गणना जैसी बुनियादी गतिविधियों को किस स्तर तक कर सकता है।
PadhAI Mitra ऐप की मार्गदर्शिका में गणित आकलन के लिए अलग विकल्प दिया गया है। पुस्तिका में बच्चे की प्रोफाइल, आकलन संबंधी स्क्रीन और परिणाम दर्ज करने की प्रक्रिया के चित्र भी शामिल हैं।
गणित आकलन की प्रक्रिया
- ऐप में बच्चे की सही प्रोफाइल चुनें।
- गणित आकलन का विकल्प खोलें।
- ऐप में उपलब्ध निर्देशों के अनुसार बच्चे से संबंधित गतिविधियां कराएं।
- बच्चे के वास्तविक उत्तर और प्रदर्शन के आधार पर परिणाम दर्ज करें।
- आकलन पूरा होने के बाद परिणाम देखें और सुरक्षित करें।
गणित में बच्चों की दक्षता को समझना
शिक्षक बच्चों की गणितीय क्षमता को समझने के लिए यह देख सकते हैं कि बच्चा संख्याओं को पहचान पाता है या नहीं, संख्याओं का क्रम समझता है या नहीं, गिनती कर पाता है या नहीं तथा जोड़ और घटाव जैसी बुनियादी क्रियाएं कर सकता है या नहीं।
ये गणितीय दक्षता समझने के सामान्य उदाहरण हैं। ऐप में वास्तविक आकलन किस प्रकार के प्रश्नों और स्तरों पर आधारित है, इसका निर्धारण उसमें उपलब्ध गतिविधियों और विभागीय मार्गदर्शिका के अनुसार किया जाना चाहिए।
यदि आकलन से पता चलता है कि बच्चा संख्या पहचान में ही कठिनाई महसूस कर रहा है, तो उसे सीधे कठिन जोड़-घटाव के सवाल देने के बजाय संख्या पहचान, गिनती और संख्या क्रम से शुरुआत करनी चाहिए। इसी प्रकार, जो बच्चे बुनियादी गणना कर सकते हैं, उन्हें उनके वर्तमान स्तर के अनुरूप आगे की गतिविधियां दी जा सकती हैं।
6. आकलन के परिणाम: बच्चे की वास्तविक स्थिति को समझना
भाषा और गणित का आकलन पूरा होने के बाद ऐप में परिणाम देखने की सुविधा दी गई है। इस सुविधा का उद्देश्य शिक्षक को यह समझने में सहायता करना है कि संबंधित बच्चे ने आकलन में कैसा प्रदर्शन किया।
परिणाम देखते समय केवल अंक या स्तर पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। शिक्षक को यह भी समझना चाहिए कि बच्चे को किस दक्षता में सहायता की आवश्यकता है और आगे उसके लिए किस प्रकार की शिक्षण गतिविधि उपयोगी होगी।
परिणामों के आधार पर शिक्षक—
- बच्चों की बुनियादी दक्षताओं से संबंधित जरूरतों की पहचान कर सकते हैं।
- जिन बच्चों को अतिरिक्त अभ्यास की आवश्यकता है, उनके लिए उपयुक्त शिक्षण योजना बना सकते हैं।
- पहले से बेहतर प्रदर्शन कर रहे बच्चों के लिए आगे की सीखने की गतिविधियां तय कर सकते हैं।
- समय-समय पर पुनः आकलन करके प्रगति का जायजा ले सकते हैं।
यहां ध्यान देने योग्य बात है कि ऐप का आकलन शिक्षक के प्रत्यक्ष अवलोकन और नियमित कक्षा शिक्षण का विकल्प नहीं है। इसका उपयोग शिक्षण संबंधी निर्णयों को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायक साधन के रूप में किया जाना चाहिए।
7. सारांश ग्राफ: आंकड़ों को सरल रूप में समझने की सुविधा
PadhAI Mitra ऐप की मार्गदर्शिका में ‘सारांश ग्राफ’ (Summary Graph) के लिए अलग पृष्ठ दिया गया है। इसमें बच्चों की शैक्षणिक स्थिति को ग्राफ के माध्यम से समझने की सुविधा दिखाई गई है।
ग्राफ का प्रमुख लाभ यह है कि बड़ी संख्या में बच्चों के आकलन परिणामों को केवल अलग-अलग रिकॉर्ड पढ़ने के बजाय एक समेकित दृश्य के रूप में समझा जा सकता है।
सारांश ग्राफ से क्या समझा जा सकता है?
मार्गदर्शिका में प्रदर्शित उदाहरणों के आधार पर सारांश ग्राफ का उपयोग निम्न उद्देश्यों के लिए समझा जा सकता है—
- बच्चों की स्थिति का समग्र अवलोकन: उपलब्ध आकलन आंकड़ों को एक स्थान पर देखकर बच्चों के शैक्षणिक स्तर की व्यापक तस्वीर समझना।
- अलग-अलग स्तरों की तुलना: यदि ऐप में संबंधित श्रेणियों के आंकड़े उपलब्ध हों, तो विभिन्न सीखने के स्तरों पर बच्चों की स्थिति की तुलना करना।
- शिक्षण की प्राथमिकताएं तय करना: जिन बुनियादी दक्षताओं में अधिक बच्चों को सहायता की आवश्यकता है, उन पर विशेष ध्यान देने की योजना बनाना।
- प्रगति की समीक्षा: अलग-अलग समय पर उपलब्ध तुलनीय आकलन आंकड़ों के आधार पर बच्चों की प्रगति की समीक्षा करना।
- शिक्षण योजना को बेहतर बनाना: ग्राफ से प्राप्त संकेतों के आधार पर कक्षा में गतिविधियों और अभ्यास का चयन करना।
बेसलाइन, मिडलाइन और एंडलाइन का महत्व
सारांश ग्राफ वाले पृष्ठ में Baseline, Midline और Endline का उल्लेख किया गया है। इनका सामान्य अर्थ इस प्रकार है—
- Baseline (प्रारंभिक आकलन): शिक्षण प्रक्रिया की शुरुआत में बच्चों की मौजूदा दक्षता का पता लगाना।
- Midline (मध्यावधि आकलन): निर्धारित अवधि के बाद यह देखना कि बच्चों की सीखने की स्थिति में क्या बदलाव आया है।
- Endline (अंतिम आकलन): निर्धारित शिक्षण अवधि के अंत में बच्चों की दक्षता का आकलन करना।
इन आकलनों के परिणामों की तुलना करके यह समझने में मदद मिल सकती है कि बच्चों ने किस दिशा में प्रगति की है और किन क्षेत्रों में अभी अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता है।
हालांकि, किसी ग्राफ से यह निष्कर्ष निकालने से पहले यह देखना जरूरी है कि सभी तुलनात्मक आंकड़े एक ही प्रकार के आकलन और समान मानकों पर आधारित हैं या नहीं। केवल ग्राफ में बदलाव दिखाई देने से किसी एक गतिविधि को सुधार का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता।
8. डेटा सिंक: आकलन के रिकॉर्ड का समन्वयन
ऐप की मार्गदर्शिका में ‘डेटा सिंक’ (Data Sync) को भी प्रमुख सुविधा के रूप में शामिल किया गया है। इसका संबंध ऐप में दर्ज जानकारी को समन्वित करने की प्रक्रिया से है।
आमतौर पर डेटा सिंक का उद्देश्य मोबाइल में दर्ज जानकारी को संबंधित डिजिटल प्रणाली के साथ समन्वित करना होता है, ताकि रिकॉर्ड निर्धारित प्रणाली में उपलब्ध हो सकें। हालांकि, पुस्तिका में इस ऐप के डेटा सिंक की पूरी तकनीकी प्रक्रिया विस्तार से नहीं लिखी गई है। इसलिए ऐप में दिखाई देने वाले वास्तविक संदेशों और विभागीय निर्देशों के अनुसार ही प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
डेटा सिंक करने की सामान्य प्रक्रिया
- आकलन पूरा करने के बाद ऐप में दर्ज जानकारी की जांच करें।
- सुनिश्चित करें कि संबंधित बच्चे का आकलन सही तरीके से दर्ज हुआ है।
- ऐप में उपलब्ध डेटा सिंक विकल्प को खोलें।
- इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध होने पर सिंक की प्रक्रिया पूरी होने दें।
- प्रक्रिया पूरी होने के बाद ऐप में दिखाई देने वाले संदेश या स्थिति की जांच करें।
- यदि सिंक पूरा नहीं होता है, तो ऐप में उपलब्ध निर्देशों के अनुसार दोबारा प्रयास करें।
सफल डेटा सिंक की पहचान
मार्गदर्शिका के ‘Data Sync’ पृष्ठ में तीन प्रकार की स्क्रीन दिखाई गई हैं—सिंक करने का विकल्प, डेटा सिंक की स्थिति और सफल सिंक की पुष्टि करने वाला संदेश।
पुस्तिका के अनुसार, सिंक प्रक्रिया पूरी होने पर सफलता का संकेत दिखाई दे सकता है। इसलिए केवल सिंक बटन दबा देना पर्याप्त नहीं है; शिक्षक को यह भी देखना चाहिए कि प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हुई है या नहीं।
यदि इंटरनेट कमजोर हो, तो सिंक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में नेटवर्क उपलब्ध होने पर दोबारा प्रयास करना और ऐप में प्रदर्शित स्थिति की जांच करना उपयोगी होगा। किसी रिकॉर्ड को सफलतापूर्वक सिंक हुआ तभी मानना चाहिए, जब ऐप में उसकी पुष्टि दिखाई दे।
9. ऐप का उपयोग करते समय शिक्षकों के लिए छह महत्वपूर्ण सावधानियां
प्रशिक्षण पुस्तिका में ‘आकलन के दौरान ध्यान देने योग्य बातें’ शीर्षक के अंतर्गत छह निर्देश दिए गए हैं। ये निर्देश आकलन को विश्वसनीय बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
1. एक समय में एक ही बच्चे का आकलन करें।
आकलन करते समय एक ही बच्चे पर ध्यान केंद्रित करें। इससे बच्चे के प्रदर्शन को सही तरीके से समझने और रिकॉर्ड करने में सहायता मिलती है।
2. शांत और व्यवधान-मुक्त स्थान चुनें।
शोर और अनावश्यक व्यवधान से बच्चे की एकाग्रता प्रभावित हो सकती है। इसलिए यथासंभव शांत वातावरण में आकलन करें।
3. आवश्यक सामग्री तैयार रखें।
आकलन की जरूरत के अनुसार पेन-पेपर तथा अन्य आवश्यक सामग्री पहले से उपलब्ध रखें, ताकि प्रक्रिया बीच में बाधित न हो।
4. बच्चे की आवाज स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड होनी चाहिए।
यदि आकलन के दौरान आवाज रिकॉर्ड करने की सुविधा का उपयोग किया जा रहा हो, तो बच्चे की आवाज स्पष्ट होनी चाहिए। आसपास के शोर से बचें और मोबाइल को उपयुक्त दूरी पर रखें।
5. गणित के लिए पेन-पेपर रखें।
गणित आकलन में आवश्यकतानुसार बच्चे को गणना करने के लिए पेन-पेपर उपलब्ध कराएं, ताकि वह निर्देशों के अनुरूप सवाल हल कर सके।
6. बच्चे को उत्तर पर सोचने का अवसर दें।
बच्चे को उत्तर सोचने और देने के लिए पर्याप्त समय दें। आकलन के दौरान उसे अनावश्यक संकेत या उत्तर बताने से बचें, ताकि दर्ज परिणाम उसकी वास्तविक दक्षता को दर्शा सकें।
इन निर्देशों का पालन करने से आकलन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है और शिक्षक को बच्चे की वास्तविक स्थिति समझने में सहायता मिल सकती है।
10. प्रधान शिक्षक और प्रधानाध्यापकों की भूमिका
प्रशिक्षण में शामिल प्रधान शिक्षक एवं प्रधानाध्यापक विद्यालय स्तर पर इस डिजिटल पहल को व्यवस्थित रूप से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उनकी जिम्मेदारी केवल ऐप इंस्टॉल करवाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि संबंधित शिक्षक ऐप के उपयोग, भाषा एवं गणित आकलन, परिणामों की समीक्षा और डेटा सिंक की प्रक्रिया को समझें।
विद्यालय स्तर पर निम्न कार्य उपयोगी हो सकते हैं—
- संबंधित शिक्षकों को ऐप के उपयोग की जानकारी देना।
- बच्चों की प्रोफाइल और आकलन रिकॉर्ड की शुद्धता पर ध्यान देना।
- भाषा एवं गणित आकलन के लिए उपयुक्त समय निर्धारित करना।
- आकलन के परिणामों के आधार पर बच्चों की जरूरतों की पहचान करना।
- शिक्षकों के साथ मिलकर उपयुक्त शिक्षण गतिविधियों की योजना बनाना।
- डेटा सिंक की स्थिति की जांच करना और तकनीकी कठिनाइयों को संबंधित स्तर पर साझा करना।
- नियमित रूप से बच्चों की प्रगति की समीक्षा करना।
साथ ही, बच्चों की व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना और ऐप का उपयोग केवल निर्धारित शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए करना भी आवश्यक है।
11. डिजिटल आकलन से शिक्षण कार्य में क्या बदलाव आ सकता है?
यदि PadhAI Mitra ऐप का उपयोग नियमित और सही तरीके से किया जाए, तो यह बच्चों की सीखने की जरूरतों को पहचानने में शिक्षकों की मदद कर सकता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी कक्षा में कई बच्चे शब्द पढ़ने में कठिनाई महसूस करते हैं, तो शिक्षक उनके लिए शब्द पहचान और पढ़ने का अतिरिक्त अभ्यास आयोजित कर सकते हैं। इसी प्रकार, यदि गणित आकलन से पता चलता है कि बच्चों को संख्या पहचान या जोड़-घटाव में कठिनाई है, तो संबंधित गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
इस तरह आकलन का उद्देश्य केवल बच्चों का स्तर दर्ज करना नहीं, बल्कि प्राप्त जानकारी का उपयोग उनके सीखने में सुधार के लिए करना है।
हालांकि, डिजिटल ऐप तभी प्रभावी सहायक साबित होगा, जब उसके परिणामों के आधार पर नियमित कक्षा शिक्षण, अभ्यास, बच्चों से संवाद और समय-समय पर पुनः आकलन भी किया जाए। केवल ऐप में आंकड़े दर्ज कर देना अपने आप में शैक्षणिक सुधार की गारंटी नहीं है।
12. प्रशिक्षण का व्यापक उद्देश्य: बुनियादी शिक्षा को मजबूत बनाना
बहेड़ी बीआरसी में आयोजित एक दिवसीय TaRL प्रशिक्षण को बच्चों की बुनियादी भाषा एवं गणित दक्षताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है।
PadhAI Mitra ऐप की उपयोग मार्गदर्शिका के माध्यम से शिक्षकों को डाउनलोड, साइन-इन, प्रोफाइल चयन, भाषा आकलन, गणित आकलन, परिणाम देखने, सारांश ग्राफ समझने और डेटा सिंक करने की प्रक्रिया से परिचित कराने का प्रयास किया गया है।
इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शिक्षक आकलन से प्राप्त जानकारी को कक्षा शिक्षण में किस प्रकार उपयोग करते हैं। बच्चों के वर्तमान स्तर की पहचान करके उन्हें उपयुक्त गतिविधियां उपलब्ध कराना, नियमित अभ्यास कराना और उनकी प्रगति की समीक्षा करना ही TaRL पद्धति का मूल उद्देश्य है।
प्रशिक्षण के दौरान मास्टर प्रशिक्षक शंभू कुमार, अंगद प्रसाद राणा, प्रदीप कुमार और नौना कुमारी ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। बीईओ मणिशंकर कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रधान शिक्षक एवं प्रधानाध्यापकों को बच्चों के वास्तविक शैक्षणिक स्तर के अनुरूप शिक्षण की प्रक्रिया से परिचित कराना रहा।
निष्कर्षतः, TaRL पद्धति और PadhAI Mitra ऐप का समन्वित उपयोग शिक्षकों को बच्चों की सीखने संबंधी जरूरतों को अधिक व्यवस्थित तरीके से समझने में सहायता दे सकता है। भाषा और गणित के आकलन, सारांश ग्राफ तथा डेटा सिंक जैसी सुविधाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब प्राप्त जानकारी को बच्चों की बुनियादी दक्षताओं में सुधार के लिए नियमित शिक्षण गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।





