खगड़िया : जिले के पहरजा-गंगौर हॉल्ट पर शनिवार की सुबह हुए रेल हादसे ने बेला सिमरी के एक परिवार को गहरे संकट में डाल दिया। पैसेंजर ट्रेन संख्या 55566 की चपेट में आने से बेला सिमरी पंचायत के वार्ड संख्या 16 निवासी 46 वर्षीय प्रभात कुमार महतो की मौत हो गई। प्रभात अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी अचानक मौत के बाद पत्नी और छह बच्चों के सामने जीवन-यापन से लेकर पढ़ाई तक की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
बताया जाता है कि प्रभात कुमार महतो लंबे समय से खगड़िया व्यवहार न्यायालय परिसर में खैनी बेचकर परिवार का खर्च चलाते थे। करीब दो दशक से अधिक समय से वह इसी काम के सहारे पत्नी अंजली देवी, चार बेटियों और दो बेटों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। परिवार के पास खेती की जमीन भी नहीं है और आय का कोई अन्य नियमित साधन नहीं बताया गया है।
ट्रेन पकड़ने के दौरान हुआ हादसा
शनिवार, 3 अक्टूबर की सुबह प्रभात कुमार महतो रोज की तरह ट्रेन से यात्रा करने के लिए पहरजा-गंगौर हॉल्ट पहुंचे थे। सुबह करीब 9:40 बजे पैसेंजर ट्रेन संख्या 55566 के आने के बाद ट्रेन में चढ़ने के दौरान वह हादसे का शिकार हो गए। ट्रेन की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही हॉल्ट और आसपास के इलाके में अफरातफरी मच गई। हादसे की जानकारी जब परिजनों को मिली तो घर में मातम छा गया। जिस व्यक्ति की मेहनत से परिवार का खर्च चलता था, उसके अचानक चले जाने से परिजन सदमे में हैं।
वर्षों की मेहनत से चलाते थे परिवार
प्रभात कुमार महतो करीब 20 से 25 वर्षों से खगड़िया व्यवहार न्यायालय परिसर में खैनी बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और घर की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश जारी रखी। नियमित आवागमन के लिए उनके पास मासिक सीजन टिकट यानी एमएसटी भी था। बताया गया कि उनके एमएसटी का आईडी नंबर 345193063362 है।
परिजनों के अनुसार, प्रभात की आमदनी बंद होने के बाद परिवार के सामने तत्काल आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। घर में कोई दूसरा सदस्य ऐसा नहीं है जिसकी नियमित कमाई से परिवार का खर्च चल सके।
छह बच्चों की जिम्मेदारी अब परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती
प्रभात महतो अपने पीछे पत्नी अंजली देवी, बेटियां सोनाली, संगम, सृष्टि और सुगंधा तथा बेटे अभिमन्यु और नवनीत नयन को छोड़ गए हैं। छह बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर परिवार चिंतित है।
बड़ी बेटी सोनाली कुमारी स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। वह सोशल मीडिया के माध्यम से वीडियो बनाकर अपने भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश भी कर रही हैं। पिता की मौत के बाद सोनाली के सामने अपनी पढ़ाई जारी रखने के साथ छोटे भाई-बहनों की चिंता भी है।
परिवार के अनुसार, प्रभात की कमाई से ही घर का राशन, बच्चों की पढ़ाई, कपड़े और अन्य आवश्यक खर्च पूरे होते थे। अब अचानक आय का स्रोत समाप्त हो जाने से परिवार को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी दूसरों की मदद की जरूरत पड़ सकती है।
छोटे से घर में रहता है पूरा परिवार
परिवार की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आठ सदस्य सीमित जगह में अपना जीवन गुजार रहे थे। परिवार के पास न खेती योग्य पर्याप्त जमीन है और न ही कोई दूसरा स्थायी रोजगार। वर्षों तक मेहनत करके प्रभात ने किसी तरह परिवार की गाड़ी खींची, लेकिन उनकी मौत ने पूरे परिवार की आर्थिक व्यवस्था को हिला दिया है।
पत्नी अंजली देवी पति की मौत के बाद गहरे सदमे में हैं। वहीं बच्चों को यह चिंता सता रही है कि अब घर का खर्च कैसे चलेगा और उनकी पढ़ाई किस तरह जारी रहेगी।
बेटी ने सरकार से सहायता की अपील
मृतक की बेटी सोनाली कुमारी ने बताया कि उनके पिता ही परिवार की पूरी जिम्मेदारी उठाते थे। उनकी कमाई से ही घर का चूल्हा जलता था। अब पिता के नहीं रहने से परिवार के सामने भविष्य को लेकर बड़ी परेशानी उत्पन्न हो गई है।
सोनाली ने सरकार और जिला प्रशासन से परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते मदद नहीं मिली तो छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और परिवार के लिए रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल होगा।
पोस्टमार्टम के बाद बेटे ने दी मुखाग्नि
हादसे के बाद शव को गंगौर थाना ले जाया गया। पुलिस की आवश्यक प्रक्रिया के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए खगड़िया सदर अस्पताल भेजा गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
बाद में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। मृतक के बेटे अभिमन्यु ने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान परिजनों और ग्रामीणों का रो-रोकर बुरा हाल था। स्थानीय मुखिया अनिल महतो ने भी अंतिम संस्कार में सहयोग किया।
ग्रामीणों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की
ग्रामीण निरंजन कुमार और आशीर्वाद कुमार ने बताया कि प्रभात महतो लंबे समय से मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार को संभाल रहे थे। उनकी मौत से परिवार अचानक आर्थिक संकट में आ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि परिवार को सरकारी स्तर से मिलने वाली सहायता और रेलवे से संभावित मुआवजे की प्रक्रिया जल्द शुरू की जानी चाहिए। परिजनों की ओर से जीआरपी-आरपीएफ से संबंधित आवेदन देने में परेशानी होने का भी आरोप लगाया गया है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
बच्चों की पढ़ाई बचाने की गुहार
परिजनों और ग्रामीणों ने बिहार सरकार, जिला प्रशासन, रेलवे तथा जनप्रतिनिधियों से परिवार की आर्थिक स्थिति का आकलन कर सहायता देने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रभात परिवार की आय का मुख्य आधार थे और उनके निधन के बाद बच्चों की शिक्षा सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका है।
परिजनों ने मृतक के परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता, बच्चों की पढ़ाई के लिए शैक्षणिक मदद, खाद्य सुरक्षा तथा पत्नी अंजली देवी को पात्रता के अनुसार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की है।
अब परिवार को उम्मीद है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित परिवार तक सहायता पहुंचाएंगे, ताकि छह बच्चों की पढ़ाई और परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह पटरी से न उतरे।





