- पिता ने खैनी बेचकर बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना देखा था… अब पिता नहीं हैं।
- सोनाली NEET की तैयारी कर रही है और पढ़ाई छोड़ने की स्थिति में है।
- क्या उसकी यह पुकार खान सर तक पहुँच सकती है?
- ट्रेन हादसे ने छीन लिया परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य
खगड़िया : खगड़िया जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत पहरजा-गंगौर हॉल्ट पर हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे ने बेला सिमरी पंचायत के वार्ड संख्या-16 निवासी एक गरीब परिवार की दुनिया उजाड़ दी।
सदर प्रखंड के बेला सिमरी पंचायत निवासी स्वर्गीय लेधु महतों के 46 वर्षीय पुत्र प्रभात कुमार महतों की शनिवार, 3 अक्टूबर को पैसेंजर ट्रेन संख्या 55566 की चपेट में आने से मौत हो गई। प्रभात कुमार महतों अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे।
20–25 वर्षों तक खैनी बेचकर चलाया परिवार
प्रभात कुमार महतों पिछले 20–25 वर्षों से खैनी बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी, परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों के साथ बच्चों की शिक्षा का खर्च भी वही उठाते थे। पिता की मौत के बाद अब परिवार के सामने दो वक्त की रोटी से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक का संकट खड़ा हो गया है। परिवार फिलहाल एक कमरे और बरामदे में किसी तरह गुजर-बसर करने को मजबूर है।
बड़ी बेटी सोनाली का सपना है डॉक्टर बनना
प्रभात कुमार महतों की बड़ी बेटी सोनाली कुमारी डॉक्टर बनने का सपना देख रही हैं। सोनाली ने बताया कि, वह खान सर की ऑनलाइन प्लेटफार्म से ऑनलाइन तरीके से NEET की तैयारी कर रही हैं। उनके पिता का सपना था कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर बेहतर भविष्य बनाएं। पिता ही उनकी पढ़ाई और परिवार की आर्थिक जरूरतों का मुख्य सहारा थे, लेकिन पिता की अचानक मौत के बाद सोनाली की पढ़ाई भी अब आर्थिक संकट की चपेट में आ गई है।
जिस पिता ने बेटी के सपने को संभाला, वही अब नहीं रहे
पिता 20 वर्षों से खगड़िया कोर्ट में खैनी बेचकर परिवार चलाते रहे। अपनी सीमित आमदनी में उन्होंने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी और बेटी सोनाली के डॉक्टर बनने का सपना देखा। लेकिन शनिवार को हुए ट्रेन हादसे ने परिवार का वह सहारा ही छीन लिया। आज सोनाली के सामने एक तरफ पिता को खोने का दर्द है और दूसरी तरफ अपने डॉक्टर बनने के सपने को बचाए रखने की चुनौती।
सोनाली ने खान सर से लगाई मदद की गुहार
पिता की मौत के बाद आर्थिक स्थिति बिगड़ने से सोनाली के लिए NEET की तैयारी जारी रखना मुश्किल हो गया है, सोनाली ने भावुक अपील करते हुए खान सर से मदद की गुहार लगाई है। साथ ही उन्होंने खान सर, बिहार सरकार, जिला प्रशासन और समाज के सक्षम एवं संवेदनशील लोगों से आर्थिक सहायता की अपील की है। उनका कहना है कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं, डॉक्टर बनना चाहती हैं और आगे चलकर अपने छोटे भाई-बहनों के भविष्य को भी बेहतर बनाना चाहती हैं। सोनाली की अपील सिर्फ मदद की नहीं, एक सपने को बचाने की है यह सिर्फ एक परिवार की आर्थिक परेशानी की कहानी नहीं है। यह उस पिता के अधूरे सपने की कहानी है, जिसने 20–25 वर्षों तक मेहनत करके अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया, लेकिन अपनी बेटी को डॉक्टर बनते देखने से पहले ही दुनिया छोड़ दी।
आज उसी बेटी के सामने सवाल है —
- क्या पिता का देखा डॉक्टर बनने का सपना आर्थिक मजबूरी के कारण अधूरा रह जाएगा?
- या फिर समाज, प्रशासन और सक्षम लोग आगे आकर सोनाली की पढ़ाई को सहारा देंगे?
🙏 एक शेयर शायद सोनाली तक मदद पहुँचा दे, खान सर तक पहुँचा दीजिए सोनाली की आवाज। हो सकता है आपकी एक शेयर की गई पोस्ट किसी ऐसे व्यक्ति तक पहुँच जाए, जो इस परिवार की मदद कर सके। सोनाली डॉक्टर बनना चाहती हैं। उनके पिता का सपना था कि उनकी बेटी डॉक्टर बने। पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन क्या उनका सपना भी उनके साथ चला जाएगा?
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📌 परिवार की स्थिति एक नजर में
– मृतक: प्रभात कुमार महतों
– उम्र: 46 वर्ष
– पिता: स्वर्गीय लेधु महतों
– निवास: वार्ड संख्या-16, बेला सिमरी पंचायत, सदर प्रखंड, खगड़िया
– घटना: पैसेंजर ट्रेन संख्या 55566 की चपेट में आने से मौत
– घटना स्थल: पहरजा-गंगौर हॉल्ट
– परिवार की आय का मुख्य स्रोत: खैनी बिक्री
– परिवार की स्थिति: इकलौते कमाऊ सदस्य की मौत के बाद गंभीर आर्थिक संकट
– बड़ी बेटी: सोनाली कुमारी
– सोनाली का लक्ष्य: NEET के माध्यम से डॉक्टर बनना
– सोनाली की अपील: खान सर, बिहार सरकार, जिला प्रशासन एवं सक्षम लोगों से आर्थिक सहायता
यह खबर मानवीय संवेदना और सहायता की अपील के उद्देश्य से साझा की जा रही है।





